नाम का कसूर
गाँव में दो लड़कों का नाम, पिता का नाम और यहाँ तक कि गाँव का नाम भी एक ही था।
अपराध किसी ने किया, पर पुलिस ने उसी को पकड़ लिया जो हाथ लगा।
बेचारे ने कहा-“साहब, गुनाह मेरा नहीं है तो मुझे क्यों गिरफ्तार किया!”
“स्याले रपट तेरे नाम की है!”
“लेकिन वह मैं नहीं हूं!मेरा नाम राशि दूसरा माखनलाल है।”
पुलिस थानेदार बुदबुदाया—“गलती अपराधी की नहीं, नाम रखने वाले की है! शिकायत करना है तो उस नाम रखने वाले से करना।हमने तो जिसे पकड़ना था ,पकड़ लिया! बात खतम!”
— डाॅ. प्रदीप उपाध्याय
