क्षणिका दीदार *ब्रजेश गुप्ता 05/09/202505/09/2025 मकान था छत थी उनको देखने के लिए छत पर कपड़े सुखाने का बहाना था जब से फ्लेट वाले हुए न मकान रहा न छत न वो बहाना दीदार का