गीत/नवगीत

माने उसको जगत सुजान

पढा-लिखाकर राह दिखाये, देते हमको समुचित ज्ञान ।
शिक्षा देकर योग्य बनाये, माने उसको जगत सुजान ।।

मान बढाते हैं शिक्षक का, दिवस मनाना साक्ष्य प्रमाण ।
राधा कृष्णन से शिक्षक ही, करें राष्ट्र का सब निर्माण ।।
दृष्टि दार्शनिक पाकर जिसने, जग में नाम कमाया खूब,
भरा कोष अक्षय विद्या का, बने तभी शिक्षक विद्वान ।
शिक्षा देकर योग्य बनाये, कहे उन्हीं को जगत सुजान ।।

योग्य बनाते जो अनघड़ को, विद्या का देकर के घोल ।
शिक्षक को कहते निर्माता, शिक्षा देते जो अनमोल ।।
वही सिखाते सब बच्चों को, अनुशासन का सच्चा पाठ,
नयी सोच से करे कल्पना, उन्नत होता तब विज्ञान ।
शिक्षा देकर योग्य बनाये, कहे उन्हीं को जगत सुजान ।।

नैतिकता का पाठ पढ़ाये, शिक्षक होता वही महान ।
बोध गम्य शिक्षा देने से, शिशु का बनता सरल रुझान ।।
अपने जैसा निपुण बनाकर, शिक्षक होते बड़े प्रसन्न
ऐसे शिक्षक का ही देखो, पूरा राष्ट्र करे सम्मान ।
शिक्षा देकर योग्य बनाये, कहे उन्हीं को जगत सुजान ।।

— लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’

लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला

जयपुर में 19 -11-1945 जन्म, एम् कॉम, DCWA, कंपनी सचिव (inter) तक शिक्षा अग्रगामी (मासिक),का सह-सम्पादक (1975 से 1978), निराला समाज (त्रैमासिक) 1978 से 1990 तक बाबूजी का भारत मित्र, नव्या, अखंड भारत(त्रैमासिक), साहित्य रागिनी, राजस्थान पत्रिका (दैनिक) आदि पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, ओपन बुक्स ऑन लाइन, कविता लोक, आदि वेब मंचों द्वारा सामानित साहत्य - दोहे, कुण्डलिया छंद, गीत, कविताए, कहानिया और लघु कथाओं का अनवरत लेखन email- lpladiwala@gmail.com पता - कृष्णा साकेत, 165, गंगोत्री नगर, गोपालपूरा, टोंक रोड, जयपुर -302018 (राजस्थान)