कविता

हिंद देश की पहचान हिंदी

हिंद देश की पहचान हिंदी,
जहॉं बहती हैं गंगा कालिंदी,
एकता का संगीतमय नाद,
हिंदी जन जन का आह्लाद ।

उद्घोष प्रखरतम् जनवाणी,
सरलतम मधुरतम् ये वाणी,
हिंदी में होते हैं भाव झंकृत,
जननी हैं देव वाणी संस्कृत ।

अभिव्यक्ति ये हर रस की,
बोली है ये जन मानस की,
अखण्डता की अमृत धार,
भारतीय हिंदी से करे प्यार ।

एक सूत्र में जिसने पिरोया,
छंद, अलंकारों में भिगोया,
जिसने जोडी़ प्रान्तिय भाषा,
हिंदी मन में बसी अभिलाषा ।

शाब्दिक अभिव्यंजना लयबद्ध,
श्रृंखला वर्णों की भी क्रमबद्ध,
समन्वय देशज भाषाओं का,
एकता की परिभाषाओं का ।

हमारा “आनंद” हर्षित गान,
भारत की आन बान शान,
मन के उद्गारों का रस राग,
हिंदी है जीवन का अनुराग ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु