बाल कविता

बच्चे देखो प्यारे प्यारे

बच्चे देखो प्यारे प्यारे
लगते है सब न्यारे न्यारे
उछल कूद करते है सारे
इधर उधर घूमते है क्यारे
पढ़ना लिखना इनको भाता
खेल खिलौने इनको आता
पेड़ पेड़ और डाल डाल पे
बाग बगीचे मन को लुभाता
घुमा चौकड़ी खेल है इनके
बचपन है खूब मस्ती करले
बच्चे से हम है गुलजार
इनके बिन सुना संसार।

— विजया लक्ष्मी

*विजया लक्ष्मी

बिजया लक्ष्मी (स्नातकोत्तर छात्रा) पता -चेनारी रोहतास सासाराम बिहार।