धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

महाशक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।

महाशक्ति राजराजेश्वरी माता दुर्गा भवानी की आराधना का शुभ कालीन अति उत्तम जन प्रचलित पर्व शारदीय नवरात्र है, जहां जगत जननी की उपासना भक्तजन श्रद्धा पूर्वक नौ दिन तक लगातार करते हैं, यह काल वर्षा ऋतु की समाप्ति और शरद ऋतु के आगमन का संधिकाल भी है जब जलवायु और मौसम में परिवर्तन होता है, अतः आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं अपितु वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी शारदीय नवरात्रों का अपना विशेष महत्व है । संसार का हर प्राणी जब तक उसके शरीर में प्राण है शक्ति की चाह रखता है यह शक्ति तन, मन, धन, आध्यात्मिक, भौतिक, अभौतिक, नैसर्गिक, लौकिक, अलौकिक सुख-सुविधाओं से संबंधित हो सकती हैं । बिना शक्ति के हर जीव निष्प्राण है । इस शक्ति के उचित प्रयोग के लिए बुद्धि की आवश्यकता भी होती है । माता दुर्गा की साधना जीव को ज्ञान, शक्ति, धन-धान्य, वैभव, शांति और स्वास्थ्य से संपन्न कर भोग और मोक्ष प्रदान करती है । संसार में ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जो माता की कृपा से संभव न हो सके, भगवती अपने सच्चे भक्तों की हर प्रार्थना स्वीकार कर हर समस्या का समाधान करती है ।
शारदीय नवरात्रे अश्वनी माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक मनाए जाते हैं । इन दिनों देवी दुर्गा के नौ रूप शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और माता सिद्धिदात्री की पूजा विधि विधान से सम्पन्न की जाती है, माता के यह नौ स्वरूप हमारे शरीर के भीतर स्थित नौ चक्रों का ऊर्जा केंद्र है, जहां हर एक दिन भगवती के एक विशेष रूप का ध्यान, चिंतन, मनन, अर्चन, पूजन, जप, तप किया जाता है, जिससे हमारी इच्छा शक्ति, बौद्धिक शक्ति, कार्मिक शक्ति, शुद्ध होती है और हमें अपने प्रारब्ध कर्मों से मुक्ति भी मिलती है । इस बार माता रानी हाथी पर सवार होकर भक्तों पर अनन्य कृपा अमृत बरसाने आ रही है जिसका ज्योतिषीय संदर्भ में और भी शुभदायक फल स्तुति गान है, साथ ही साथ इस बार नवरात्रि के नौ दिनों में तृतीया तिथि की वृद्धि होने से सभी भक्तजन पूरे दस दिनों तक माता की आराधना कर सकते हैं यह अपने आप में अति विशेष महत्व रखता है । भारत के अलग-अलग प्रांतों में शारदीय नवरात्रों में दुर्गा पूजा की रौनक और छटा अद्भुत होती है, भजन, कीर्तन, जागरण, हवन इस तरह के कई धार्मिक अनुष्ठान घर-घर में श्रद्धा पूर्वक आयोजित किए जाते हैं ।
अपने भीतर की आत्मिक शक्ति पुंज को प्रज्वलित करने का यह समय अति उत्तम है । साधना से जीवन में कई परिवर्तन होते हैं साथ ही साथ तन-मन का शुद्धिकरण भी होता है, देवी भगवती दुर्गा सच्ची उपासना से अति शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्त की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं । कहते हैं ना यदि मन में “आनंद” है तो बाहर का संसार भी आनंदकारी लगता है और वहीं अगर मन व्यथित हैं, चिंताग्रस्त है तो हर सुख व्यर्थ, अर्थहीन लगता है, कुछ भी अच्छा नहीं लगता है । जिस भक्त को माता की कृपा पर विश्वास है वह और भी अधिक श्रद्धा और गहरी भक्ति के साथ भगवती की साधना इन नौ दिनों में पूरे विधि-विधान के साथ करता है । भक्त की आस्था परिणाम नहीं भीतर के परिवर्तन का प्रत्यक्ष गुणगान करती हैं और यही असंभव को संभव बना चमत्कारी प्रभाव उत्पन्न करती हैं । नवरात्रि में माता रानी की श्रद्धापूर्वक आराधना कर हर प्रकार के दैहिक, दैविक, भौतिक कष्टों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती हैं चाहे वो दुःख प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष ।
यह कदापि जरूरी नहीं है कि आप दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ स्वयं करें क्योंकि यह हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं है, किंतु आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार भगवती के नामों का संकीर्तन कर सकते हैं, आप कोई मातारानी के सरल मंत्र का शुद्ध भाव रख जप कर सकते हैं, नौ दिन व्रत उपवास करना संभव न हो तो आप सात्विक भोजन कर इन नौ दिनों में भगवती की आराधना कर सकते हैं । महामाई देवी दुर्गा बहुत दयालु है, माता की कृपा जिस पर होती है वह संसार का सबसे धनवान व्यक्ति है, माता अपने भक्तों की रक्षा करती हैं, उनके सभी अपराधों को क्षमा करती हैं और अनंत कृपा बरसती है । इस बार इन शारदीय नवरात्रों में आप धूमधाम से, प्रसन्नचित्त मन से, सच्ची श्रद्धा भक्ति भाव से, माता रानी की आराधना अवश्य कीजिए और माता से विशेष कृपा प्राप्त कर अपने जीवन को उलझनों से मुक्त कर सुखमय, समृद्धि सम्पन्न, स्नेह आनंद प्रेम से भरपूर आज और मंगलकारी भविष्य का निर्माण स्वयं कीजिए । आप सभी के जीवन में यह शारदीय नवरात्रे शुभता लेकर आएं इसी मंगलमय प्रार्थना के साथ आप सभी को मेरा प्रणाम और शारदीय नवरात्रों की ढेर सारी शुभकामनाएं । सभी का कल्याण करने वाली हे जगजननी जगदम्बा ! आपको मेरा प्रणाम हैं, धन्यवाद हैं, मातारानी आप सभी का कल्याण करें, आपको सर्वस्व समर्पित, जय माता दी ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु