गीत/नवगीत

महाराजा श्री अग्रसेन जी

हाथी, घोड़ा और पालकी
जय हो श्रीअग्रसेन महाराज की।

लगभग ५१०० वर्ष पूर्व वे जन्मे
अग्रोहा रही उनकी राजधानी
अभी भी तमाम साक्ष्य उपलब्ध हैं
उपलब्ध हैं अनेकानेक निशानी।

देश भर में निकल रही हैं
आज उनकी मनमोहक झांकी
जय हो श्रीअग्रसेन महाराज की।

क्षत्रिय कुल में जन्म लिया
भगवान श्री राम जी के हैं वंशज
बाद में अग्रवाल समाज बनाया
अग्र-कुल को शिखर पर पहुंचाया

आई उस महानायक की जयंती
जिसने मिसाल बनाई एकता की
जय हो श्रीअग्रसेन महाराज की।

महाभारत के युद्ध में भाग लिया
पाण्डवों का युद्ध में साथ दिया
न्यायप्रिय राजा व महान सुधारक
सब जनकल्याणकारी काम किया

चलो सब मिल करें उनकी आरती
जय-जय श्री लक्ष्मी माई की
जय हो श्रीअग्रसेन महाराज की।

१८ गोत्रों से पहचान दिलवाई
अग्र-कुल की पताका फहराई
समाज को एकता के सूत्र में बांधा
निर्धनता घर-घर से मिटाई।

एक ईंट, एक रूपैया का दे नारा
समाजवाद को नई पहचान दी
जय हो श्रीअग्रसेन महाराज की।

अहिंसा के थे वह परम पुजारी
बलि प्रथा के घनघोर विरोधी
सनातन में अटूट आस्था थी
जन-कल्याण में जिंदगी खपा दी।

मां लक्ष्मी जी के वे परम उपासक
लक्ष्मी जी ने भी भरपूर कृपा की
जय हो श्रीअग्रसेन महाराज की।

सत्य के मार्ग पर सदा चले वह
वचन के पक्के और थे अभिमानी
सिद्धान्तों पर रहे सदैव अडिग
थे करुणामय और बलिदानी।

‌शिव के थे अनन्य भक्त वह
निकल रही है उनकी पालकी
जय हो श्रीअग्रसेन महाराज की।

विश्व के व्यापार के बड़े हिस्से पर
अग्रवाल समाज का योगदान है
अर्थ-व्यवस्था की नींव अग्रवाले
अग्रवाल होने का हमें अभिमान है

हमारे लिए तो वे साक्षात ईश्वर
थे परम वीर वह और महादानी
जय हो श्रीअग्रसेन महाराज की।

हाथी, घोड़ा और पालकी
जय हो श्रीअग्रसेन महाराज की।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई