कविता

रिश्तेदारों का व्हाट्सएप ग्रुप

नए जमाने का चलन क्या कहें, बताओ आप ?
घर पर बोलचाल है बंद व्हाट्सएप पर वार्तालाप
कुछ बोलें बतियायें कुछ forwarded मैसेज वाले
और कुछ VIP सदस्य सब पढ़ लेते चुपचाप
नए जमाने का चलन क्या कहें, बताओ आप ?

सुबह सबेरे कोई गुड मॉर्निंग लिखकर सो जाये
कोई सबके पाप सदा सत्संगों से धो जाये
घर बैठे तीर्थों के दर्शन
कभी गान वादन और नर्तन
तड़के भक्ति की सरिता में बहते हैं निष्पाप
फिर दिन भर वो ही प्रपंच करते बिन पश्चाताप
तो नए जमाने का चलन क्या कहें, बताओ आप ?
घर पर बोलचाल है बंद व्हाट्सएप पर वार्तालाप

सबको देख बदलने की हम भी अब सोच बनायें
रंगे सियार की तरह स्वयं को रंग-बिरंग रंगायें
इससे उसकी उससे इसकी
बातें छुपके किसकी किसकी
पर्सनल चैट पे चुगली लेकिन ग्रुप में प्रेम मिलाप
“गीत” नए सुर साध लो, सुनकर सबके तान आलाप
ये नए जमाने का चलन क्या कहें, बताओ आप ?
घर पर बोलचाल है बंद व्हाट्सएप पर वार्तालाप

— प्रियंका अग्निहोत्री “गीत”

प्रियंका अग्निहोत्री 'गीत'

पुत्री श्रीमती पुष्पा अवस्थी