कविता

अनुप्रेक्षा

मन में उठे भाव,
अनित्य का बोध दिलाए,
जीवन का सच।

धूप छांव जैसी,
क्षणभंगुर यह देह कहे,
अनुप्रेक्षा सिख।

नदियों का बहाव,
रुक न सके पल दो पल भी,
समय की धारा।

पत्तों की सरसर,
कहती जीवन क्षणभंगुर,
जग की सच्चाई।

शांत चित्त भीतर,
चिंतन में डूबा मन है,
अनुप्रेक्षा दीप।

गहरे धुंधलके,
सत्य की राह दिखाए,
मौन की वाणी।

तारों की झिलमिल,
बोलें अनित्य जीवन का,
क्षणिक सौन्दर्य।

हवा के झोंके,
कहते सब बंधन छोडो,
मुक्ति का संदेश।

चाँदनी की छांव,
आत्मा को समझाए बस,
शुद्धि की राहें।

बादल बिखरें,
क्षण में रूप बदल जाए,
अनुप्रेक्षा ज्ञान।

जीवन का आधार,
सच को पहचानना है,
अनुप्रेक्षा पथ।

मौन साधना में,
सत्य का दर्शन मिलता,
मन निर्मल होता।

— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com