विश्व दृष्टि दिवस केवल एक दिन नहीं,राष्ट्र निर्माण का आदर्श है,
“व्यापक स्तर पर लोगों का ध्यान आंखों की समस्याओं, उनके कारणों और बचाव के उपायों की ओर जाता है। नेत्र जांच शिविर, जागरूकता अभियान, बच्चों व बुजुर्गों को लक्षित कार्यक्रम आयोजित होते हैं। लोगों को यह समझाया जाता है कि समय पर उपचार से अंधापन रोका जा सकता है।”आधुनिक जीवनशैली, भागदौड़ और डिजिटल उपकरणों ने आज हमारे नेत्र स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। हर साल अक्टूबर का दूसरा गुरुवार हमें नेत्र स्वास्थ्य की अहमियत याद दिलाता है। कोई भी समाज जब नेत्र स्वास्थ्य को प्राथमिकता देता है, तो न केवल व्यक्तिगत जीवन में सुधार आता है, बल्कि विद्यार्थियों, श्रमिकों और वरिष्ठ जनों की जीवनशैली, उत्पादकता व आत्मसम्मान भी बढ़ता है।
आंखें केवल देखने का माध्यम नहीं, जीवन की रंगत, शिक्षा की उन्नति, सामाजिक आत्मनिर्भरता और रचनात्मकता की आधारशिला भी हैं। विश्व दृष्टि दिवस हम सबको जागरूक करता है कि यदि निवारण योग्य अंधता का समय पर उपचार हो जाए तो लाखों लोग उजाले की ओर लौट सकते हैं। बच्चों को अपनी आंखों से प्रेम करना, बुजुर्गों को समय पर नेत्र जांच कराना, युवाओं को स्क्रीन से आराम देना,ये छोटे-छोटे कदम समाज की दृष्टि को उज्ज्वल बना सकते हैं।
आज का दिवस हमें प्रेरित करता है कि अपने आस-पास के हर व्यक्ति को नेत्र स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाएं, सरकारी/गैरसरकारी नेत्र शिविरों में स्वयं पहल करें और नेत्रहीनों की मदद करके उनके सपनों में रंग भरने का काम करें। यदि हम नेत्र स्वास्थ्य को प्राथमिकता देंगे और जागरूकता फैलाएंगे, तो विकास की प्रत्येक सीढ़ी पर सफलता का उजाला हम सबके चेहरे पर दिखाई देगा।
विश्व दृष्टि दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन आंखों के महत्व को पहचानने, बचाव के उपायों को अपनाने और समाज को जागरूक बनाने की आवश्यकता है। यही सच्ची नेत्र सेवा है और यही जागरूक राष्ट्र निर्माण का आदर्श है
— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह
