गज़ल
कान जिनके बहरे हैं शोर सुनाई नहीं देते
आम आदमी कभी उनको दिखाई नहीं देते
हरदम जो अपने ही लाभ का सोचते रहते हैं
वे अपने मन से दूजों को दुहाई नहीं देते
इसे दोष मत कहो, कहो ज़माने का असर यारों
बाप यदि बीमार है बेटे दवाई नहीं देते
घर-घर में ही हो रहा है महाभारत आज भी
इक इंच की ज़मीन अब तो सगे भाई नहीं देते
कानून की निगाह में साफ अपराधी है रमेश
फिर भी उसके खिलाफ तो गवाही नहीं देते
— रमेश मनोहरा
