तो ठुकरा दो
जिसे वक्त रहते तुम्हारी कद्र न हुई,
उसे वक्त रहते ही बता दो।
अपनी अहमियत को खुद समझों,
अपने लिए खुद रास्ते बना लो।
जिसका जैसा मन हुआ,
उसने वैसा तुम्हारे साथ किया।
तुम बदला मत लो,
लेकिन…..
बदलाव इतना लाओ
अपने जीवन में,
कि जब वो आए,
हाथ बढ़ाए
और कहे,
‘चलो फिर से एक ही रास्ते पर चलते हैं,’
तो इस बार तुम उस हाथ को ठुकरा दो।
— अंकिता जैन अवनी
