लघुकथा

डॉक्टरी पेशा

डॉक्टर साहब डॉक्टर साहब चिल्लाता हुआ एक आदमी शहर के नामी डॉक्टर के क्लीनिक में घुसा, सबसे पहले उसे सिक्योरिटी गार्ड ने पकड़ा और चुपचाप बैठने को कहा, उस पर काउंटर पर बैठी लड़की ने आकर बड़े गुस्से में कहा चुपचाप बैठो आपका नंबर आने पर आपको डॉक्टर साहब देखेंगे। वह आदमी चिल्लाया, मेरा बच्चा बहुत बीमार है , बहुत हालत नाजुक है और मुझे अभी डॉक्टर साहब को लेकर अपने घर जाना है वरना कुछ भी हो सकता है। 

काउंटर पर बैठी लड़की बहुत गुस्से में आई और बोली डॉक्टर साहब ऐसे नहीं देखते ,पहले अपॉइंटमेंट देनी पड़ती है और उसके बाद जो तारीख या नंबर देंगे उसके हिसाब से देखेंगे, आप पहले अपना नंबर लगाइए। वह आदमी रोता हुआ चिल्लाया , मेरा बच्चा बहुत बीमार है मुझे अभी डॉक्टर साहब को लेकर जाना है। अब तो वह लड़की और गुस्से में बोली यह बहुत बड़े डॉक्टर है ऐसे किसी के घर जाकर नहीं देखते। नंबर आने पर देखने के हजार रुपए फीस है इमरजेंसी में देखना हो तो 2000 और अगर घर जाकर देखना हो तो ₹4000 फीस डॉक्टर साहब लेते हैं

अब तो वह आदमी रोता हुआ गुस्से में बोला   लड़की क्या मेरा नंबर लगाइए मैं कैसे भी हो डॉक्टर साहब को लेकर अपने घर जाऊंगा। ऊपर से लड़की बोली पहले ₹4000 जमा करो ,फिर नंबर लगेगा और जब डॉक्टर साहब की फीस का बिल आएगा तो उसमें यह  एडजस्ट हो जाएंगे। उस आदमी ने ज़ेब से ₹ 4000 निकाल कर लड़की के मुंह पर मारे और सीधे ही डॉक्टर साहब के केबिन में घुस गया। सिक्योरिटी गार्ड और वह लड़की पीछे-पीछे डॉक्टर साहब की केबिन में घुसे, चिल्लाने लगे , हमने इस आदमी को बहुत मना किया लेकिन यह नहीं मानता ।सीधे आपके कमरे में घुसकर आ गया है। 

लेकिन वह सिक्योरिटी गार्ड और लड़की यह देखकर परेशान हो गए की उस लड़के ने पहले डॉक्टर साहब के पाँव छुए,फिर डॉक्टर साहब ने उसे गले से लगाया और उससे सीधे ही ,पूछा बेटा तुम कब आए।

पापा मैं कल ही लंदन से आया हूं और अपने एक मित्र को मुझे लेने के लिए बुला लिया था, आप बहुत व्यस्त रहते हैं इसलिए भी आपको नहीं बुलाया और मैं आपको सरप्राइस देना चाहता था। 

पर मेरे मित्र ने जो मुझे बताया उससे मुझे बहुत दुख हुआ। एक गरीब आदमी जिसका बच्चा बहुत बीमार था वह ऐसे ही आपके क्लीनिक में आया था लेकिन आपके गार्ड और इस काउंटर पर बैठी लड़की ने उसे नहीं घुसने दिया, उसका बच्चा बहुत ज्यादा बीमार था उसकी जान बच सकती थी लेकिन उस आदमी को उन्होंने आप तक नहीं पहुंचने दिया और वह आदमी रोता चिल्लाता, वापस चला गया ,

पापा डॉक्टर पेशा सबसे बड़ी मानव की सेवा है, इसे व्यापार न बनाएं,बस यही मैं चाहता हूं कि आप हर गरीब का इलाज मुफ्त में करें ,ठीक है जो अमीर है , पैसा दे सकते हैं , उनसे जरूर फीस लें ,लेकिन ऐसे इस को अपना धंधा ना बनाएं।

डॉक्टर भी भगवान का रूप है, जीवन दान देते हैं, नए बच्चों को जन्म देने में सहायता करते हैं, पापा आप भी गर्व से यह सेवा का काम करें।

पिता ने बेटे को और जोर से गले लगाया और था बेटा मुझे और शर्मिंदा मत करो आपकी बात मानूंगा और हर गरीब का मुफ्त इलाज करूंगा और जैसे जिसकी जरूरत होगी उतनी जल्दी उसका इलाज करूंगा।

— जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845