देव उठनी एकादशी तुलसी विवाह
कार्तिक शुक्ल पक्ष की ग्यारस तिथि अति शुभकारी,
सभी भक्तजनों पर कृपा करते श्री गिरिधर बनवारी,
प्रभु पालन पोषण की व्यवस्था को पुनः करते धारण,
अभी चातुर्मास की योगनिद्रा से जागृत होते नारायण ।
ये तिथि देव प्रबोधिनी देव उठनी एकादशी कहलाती,
भक्तमण्डली “आनंद” मग्न श्री हरि के कीर्तन गाती,
तुलसी व शालिग्राम जी का विवाह भक्तजन रचातें,
दीपमालिका सजाकर उत्सव धूमधाम से हैं मनाते ।
तुलसी माता अपने भक्तों पर अनन्य कृपा करती,
हरि को वो है परम प्रिय भक्तों के दुख सारे हरती,
पूजन वंदन श्रद्धा भक्ति भाव से करते वैष्णव जन,
तुलसी व शालिग्राम जी के नामों का करते स्मरण ।
कहीं कहीं पर इस दिन होता हैं भक्तिमय जागरण,
शुद्ध भक्तिभाव से शीघ्र प्रसन्न होते लक्ष्मीनारायण,
सुख समृद्धि और स्वास्थ्यदायिनी हैं तुलसी माता,
कार्तिक मास में विशेषकर उनको हैं पूजा जाता ।
आरोग्यता को प्रदान करती तुलसी है मंगलकारी,
विष्णु सहस्रनाम का पाठ इस दिन हैं लाभकारी,
हे तुलसी माता ! तुम मेरे ऑंगन हरी-भरी रहना,
मेरे परिवार पर सदा अपनी कृपा बरसाती रहना ।
— मोनिका डागा “आनंद”
