पुस्तकें ही ज़िन्दग़ी है
पन्नों में बसी
बीते युगों की खुशबू,
मन को महकाए।
शब्दों की नाव,
विचारों की लहरों पर,
सफ़र सुहाना।
हर पृष्ठ कहे,
जीवन के रंग अनेक,
ज्ञान का दीपक।
मौन में बोले,
अक्षरों का संगीत,
आत्मा सुनती।
स्याही में बहती,
अनुभवों की नदी,
मन प्यासा पीए।
पुराने ग्रंथों से,
झरते हैं उजाले,
बुद्धि जगमगाए।
काग़ज़ की खुशबू,
स्मृतियों का आलिंगन,
दिल को छू जाए।
जो पढ़ ले इनको,
वो संसार समझेगा,
स्वयं को भी पाए।
पुस्तकें देतीं,
जीवन को अर्थ नया,
सदा अमर रहना।
— डॉ. अशोक
