मेरा परिचय
क्या परिचय दूँ, अनिकेतन हूँ, यायावर हूँ, मतवाला!
जननी ललिता हैं, जनक शम्भु, पूरा परिवार निराला!!
मेरा नाम गणेश और संगिनी, अनुपमा संध्या !
ज्योतिर्मय मेरा तनय सुघर, तनया ज्योत्सना सुधन्या!!
भिन्न भिन्न पुष्पों से सज्जित, कोई उपवन जैसे!
गमक रहे घर भाई बहिनों के, बसंत ऋतु जैसे!!
भाई बहिनों में स्नेह प्रेम, सद्भाव क्षमा का डेरा!
ईर्ष्या करते हैं देव दनुज, सहयोग भरा घर मेरा!!
पीपल का आदम वृक्ष जहाँ, वह मेरा गाँव पिपरिया!
उमरार नदी तट पर स्थित, है मेरा जिला उमरिया!!
निर्मल अथाह उमरार जलाशय, जिसकी जीवन रेखा!
आदिम जनजाती बहुल क्षेत्र, छल छंद न जिनमें देखा!!
है विंध्य क्षेत्र (मप्र) में बांधवगढ़, जिसकी है शान निराली!
है वन प्रखंड हरियाली से, छनती सूरज की लाली!!
जो धरा श्वेतसिंहों की है, आक्षादित वन उपवन से!
जहाँ बातें करते साल वृक्ष, नित आसमान सूरज से!!
जहाँ मृग करते किल्लोल, और मृगराज लजाते से हैं!
उस पावन माटी का जाया, शुक गान सुनाते से हैं!!
चातक पिक की पिउ पिउ कुहुक, खगकुल कलरव करते हैं!
मादर टिमकी खँजरी ले, करमा विरहा सजते हैं!!
जो काले सोने की धरती, तन काले मन उजले हैं!
जहाँ मढ़ीबाग शिव अटल अचल, और महादेव रमते हैं!!
कर्चुली राज्य की गाथाएँ, जहाँ धरती खुद गाती है!
ज्वाला विरासिनी शारद माँ, का वैभव बतलाती है!!
नर्मदा तुंगभद्रा (सोन) बहनें, बहती जिसकी सीमा से!
दोनों सरिताएं सेवा करती, जन की तन मन धन से!!
जहाँ सहज सरल व सुहृद सभी, जन कम में गुजर करते हैं!
उस माटी का मैं लाल जहाँ, शिव सती संग रमते हैं!!
खानाबदोश सा जीवन है, मैं भारत माँ का शहरी!
है विकट परिस्थिति में जीवन, तन मन से सीमा प्रहरी !
जीवन की आपाधापी में, हैं पाँच दशक कब के बीते!
घट काम क्रोध मद लोभ भरे, मानव मन के कब रीते!!
बचपन से संकल्प नए, विस्वास नए गढ़ता हूँ!
सेवा व समर्पण दया दान, परमारथ घट भरता हूँ!!
न्यायशास्त्र के प्राणेता, गौतम ऋषि का वंशज हूँ!
कदाचार अन्याय न करता, न इनको सहता हूँ!!
अभिनंदन सबका करता हूँ, आदर है प्रबल समय का!
डर नहीं काल का भी मुझको, कर्तब्य प्रमुख जीवन का!!
है पुण्यभूमि के लिए समर्पित, तन मन धन सब मेरा!
जो कुछ भी है हे मातृभूमि, न्यौछावर है सब तेरा !!
— गणेश दत्त गौतम
