ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है
तरु पल्लव लालम लाल हुए मादकता छाई है जग मेंनवयौवना सी लगे प्रकृतिमद का संचार करें मन मेंतेरे आगमन की
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Read Moreकितने ही जयचंद यहाँ जो पीठ में छूरा भोक रहे!कहते दिलदार भेडियों को माँ की छाती को नोंच रहे। गद्दार
Read Moreक्या परिचय दूँ, अनिकेतन हूँ, यायावर हूँ, मतवाला!जननी ललिता हैं, जनक शम्भु, पूरा परिवार निराला!! मेरा नाम गणेश और संगिनी,
Read Moreवेदव्यास के महाकाब्य का चीरहरण करने वाले!नमन तुम्हें हे रश्मिरथी कह उद्धारक बनने वाले!!महिमा मंडन दिनकर ने अपने सुत का
Read Moreमाँ कुष्मांडा ध्याइये प्राणशक्ति संचार।वरदायिनी मंगलकरनि सूक्ष्म जगत आधार।। शुद्ध स्वरूपा भगवती करुणामयी कामारि।जगजननी त्रिपुरेश्वरी बीजमंत्र हीं मानि।। भयहारिणी मंगलकरनि
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