कविता

गऊ ग़ज़िया

सब सह लेगी गऊ ग़ज़िया देश की मेरे
सावधान!
यह राष्ट्रद्रोह अब नहीं सहेगी।

खूब करो तुम चाहे चोरी भ्रस्टाचारी!
चाहे मरें भूख मंहगाई से मजदूर किसान!
लगा रहे जो नारे जयकारे दुश्मन के!
लहराते हो जिनके झंडे!

ए झूठे झंडावरदारो !
उनकी गोली
करती छलनी देश का सीना !
लिपटे आयें लाल तिरंगे के आँचल में!
जागो कौमी गद्दारो !
अब और गाज़िया नहीं सहेगी!

खूब सियासत करो आपसी जनता को एतराज नहीं!
गाली अपनी माटी को दो फिर गूँगे बीमार बनों!
ये बड़बोले देशद्रोहियो!
दाल तुम्हारी नहीं गलेगी!
गाज़िया- जनता

— गणेश दत्त गौतम

गणेश दत्त गौतम

पिता- स्व शंभू दत्त गौतम माता- स्व. श्रीमती ललिता ज.ति. - 06-07-1967 अभिरुचि हिंदी - कविता एवं गीत लेखन सम्प्रति- इंस्पेक्टर (विशेष संक्रिया) फ्रंटियर मुख्यालय, बीएसएफ, भिलाई (छत्तीसगढ़) में सेवारत निवास-- ग्राम पिपरिया, उमरिया, मप्र मो.नं.-- 9462495285