गऊ ग़ज़िया
सब सह लेगी गऊ ग़ज़िया देश की मेरे
सावधान!
यह राष्ट्रद्रोह अब नहीं सहेगी।
खूब करो तुम चाहे चोरी भ्रस्टाचारी!
चाहे मरें भूख मंहगाई से मजदूर किसान!
लगा रहे जो नारे जयकारे दुश्मन के!
लहराते हो जिनके झंडे!
ए झूठे झंडावरदारो !
उनकी गोली
करती छलनी देश का सीना !
लिपटे आयें लाल तिरंगे के आँचल में!
जागो कौमी गद्दारो !
अब और गाज़िया नहीं सहेगी!
खूब सियासत करो आपसी जनता को एतराज नहीं!
गाली अपनी माटी को दो फिर गूँगे बीमार बनों!
ये बड़बोले देशद्रोहियो!
दाल तुम्हारी नहीं गलेगी!
गाज़िया- जनता
— गणेश दत्त गौतम
