कविता

राम नाम

तिनके सी मर्यादा और कितने आशाराम!
राम के नाम का बाजार गर्म है।
कोई तोताराम तो कोई रामरहीम सा तना है।
कहाँ जाएं लिखाएं रपट!
फिर रोज़ दलीलें दलीलों पर दलीलें और सवाल पर सवाल कैसे कैसे सवाल।
चाहे थानेदार वकील जज सब हों महिला की जात !
पर सब के सब खेलेंगे जज़बात जज़बात!
फिर फिर टुकड़ों टुकड़ों में बलात्कार!
लगातार!
माँ बेटी को आज भी समझाती है, मर्यादा!
होठों को सिल औरत तो धरती है !
शीत घाम मेघ सब चुपचाप सहती है!
कैसे कैसे सब्जबाग कैसे कैसे दबाब !
आख़िर अधिकतर सच हो जाते हैं न्याय की देहरी में जाने से पहले ही खारिज़!
औरत के संग ज्यादतियों की सबसे बड़ी आरोपी साझीदार है औरत की जात।

— गणेश दत्त गौतम

गणेश दत्त गौतम

पिता- स्व शंभू दत्त गौतम माता- स्व. श्रीमती ललिता ज.ति. - 06-07-1967 अभिरुचि हिंदी - कविता एवं गीत लेखन सम्प्रति- इंस्पेक्टर (विशेष संक्रिया) फ्रंटियर मुख्यालय, बीएसएफ, भिलाई (छत्तीसगढ़) में सेवारत निवास-- ग्राम पिपरिया, उमरिया, मप्र मो.नं.-- 9462495285