ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है
तरु पल्लव लालम लाल हुए मादकता छाई है जग में
नवयौवना सी लगे प्रकृति
मद का संचार करें मन में
तेरे आगमन की खुशियां हैं
मधुबन में मानव मन में
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतूराज तुम्हारा स्वागत है।।
श्रंगार प्रकृति नूतन करके
सौंदर्य बिखेर रही जग में
धानी चुनरी में लिपट गई
बौराई फिरे जमाने में
ऋतूराज तुम्हारा स्वागत है ऋतूराज तुम्हारा स्वागत है ।।
जलचर थलचर नभ सचराचर
जीवंत हुए चैतन्य हुए
सर सर सर सरकी पुरवाई
अंगड़ाई मस्ती भरे हिये
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ।।
बौराए महुआ आम कदम
मादकता छाई जन मन में
देखो फिर प्रकृति प्रबुद्ध हुई
सोलह श्रंगार किए तन मे
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ।।
यह चांद तेरी अगवानी में
अद्भुत अनुपम श्रंगार किए
रतिपति की ओर निहार रहा
यौवन का अधिभार लिए
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ।।
पाषाढ़ हिया पानी कर दे
तुझमें वह शक्ति है अनंग
कण कण में कलरव तू कर दे
वह क्षमता तुझमें है निसंग
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतु राज तुम्हारा स्वागत है ।।
संगीतकार का वाद्ययंत्र
अब नूतन राग का सृजन करे
तेरी अगवानी को बसंत
पंचम स्वर कोयल गान करे
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ।।
चातक पियु पियु पुकार रहा
तुम छाये हो वन गृह उपवन
यह अद्भुत उत्सव है अनंग
जल थल नभ में जग जीवन में
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है।।
उत्सव मे रतिपति स्वागत है
उल्लास भरी जग की छाती
उत्साह उमंग भरा हर मन
मनमंदिर सजा रखी बाती
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है।।
हो गई बिदा अब शरदाऋतु
होली का उत्सव गरमाया
श्रृंगार किये अभिमान किये कलि मनुहार करे अलि मदमाया
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है।।
ये मदन सदन ऋतुराज देख
अब उड़ गुलाल आकाश चढ़ा
शुभदिन पीताम्बरी हुई धरा
मधुमास साथ ले हाथ बढ़ा
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है।।
श्रमनायिका फिर से बौराई
रातिसंग सजी बही पुरवाई
तेरे आगवन की ख़ुशियों मे
मदमायी जूही हर्षाई
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है।।
बासंती रंगो वस्रों मे
पुष्पो से प्रकृति श्रंगार किये
तेरे वंदन को लालायित
न्योछावर आँखे चार किये
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है।।
वह कवि द्वारा श्रृंगारित हो
रागी द्वारा जाती गायी
घर घर मे हलवा बासन्ती
करे प्रकृति तेरी अगवाई
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है।।
यह वाग्देवी का सूर्यकांत का जन्मदिवस
यह गंगा का अवतरण दिवस
तुम पुण्यकर्म के संवाहक
हे जीवजगत के संचालक
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है।।
— गणेश दत्त गौतम
