कविता

मेरे प्रिय

दूर उस आसमान में तारों के सिवा,
चाँद नहीं है, मेरे प्रिय।
झील में लहरों के सिवा,
कुछ नहीं है, मेरे प्रिय।
और किसी से प्रेम न करूँ मैं,
तेरे समान कोई नहीं है, मेरे प्रिय।
तू सागर के बीच,
मैं अपने आँगन में,
हम दो जगह हैं, मेरे प्रिय।

— अमन्दा

एस. अमन्दा सरत्चन्द्र

श्री लंका