मेरे प्रिय
दूर उस आसमान में तारों के सिवा,
चाँद नहीं है, मेरे प्रिय।
झील में लहरों के सिवा,
कुछ नहीं है, मेरे प्रिय।
और किसी से प्रेम न करूँ मैं,
तेरे समान कोई नहीं है, मेरे प्रिय।
तू सागर के बीच,
मैं अपने आँगन में,
हम दो जगह हैं, मेरे प्रिय।
— अमन्दा
