कविता
सड़ चुका एकवृक्ष का तना,अपने भीतर यादों काअनगिनत खज़ाना सँजोए हुए।क्या उसे उखाड़ फेंक दूँ,याफिर वैसे ही रहने दूँ?कोई निर्णय
Read Moreएक पुस्तक मेंपन्नों के बीच छिपा हुआएक खाली पन्ना था।क्यों है यह पन्नाइतना अधिक खाली?मैंने थोड़ी देरऔर ध्यान से देखा।क्षण
Read Moreदूर उस आसमान में तारों के सिवा,चाँद नहीं है, मेरे प्रिय।झील में लहरों के सिवा,कुछ नहीं है, मेरे प्रिय।और किसी
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