कविता
बचपन की अरुणिम किरणों कासाथ लिए,मुस्कुराते हुए जीवनआगे बढ़ता है।स्मृतियों के नन्हे कण भी,दूर क्षितिज परचमकते प्रतीत होते हैं।यौवन की
Read Moreएक पुस्तक मेंपन्नों के बीच छिपा हुआएक खाली पन्ना था।क्यों है यह पन्नाइतना अधिक खाली?मैंने थोड़ी देरऔर ध्यान से देखा।क्षण
Read Moreदूर उस आसमान में तारों के सिवा,चाँद नहीं है, मेरे प्रिय।झील में लहरों के सिवा,कुछ नहीं है, मेरे प्रिय।और किसी
Read Moreएक फूल खिला सूर्य देव को देखने के लिए,सुगंध के साथ और भीसुंदरता लेकर।उस फूल के चारों ओरमधुमक्खियाँ मंडराती रहीं,पर
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