कविता
जीवन अगर एक हवा है,
बहते-बहते दूर चले जाए,
उसे बहने दो कहीं,
पर यह भी सोचो मन से,
वह जाएगा किस दिशा में।
जीवन अगर वर्षा है,
धरती पर गिरता कहीं,
सोचो किस स्थान पर,
मैं बूँद बनकर गिरूँ कहीं!
अगर जीवन एक नदी है,
क्या अंत में यह जीवन
समुद्र में ही मिल जाए?
जीवन के इन रूपों को
हर प्राणी महसूस करें,
अंतहीन यह जीवन है,
इसमें कोई संदेह नहीं रहे।
— अमन्दा
