राजनीति

जीवंत लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्य, एक सशक्त राष्ट्र का आधार

वर्तमान समय में देश के भीतर सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक स्तर पर जो एक तीव्र हलचल और मंथन का दौर चल रहा है, वह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हमारा लोकतंत्र जीवंत और जागृत है। आज जब डिजिट्ल क्रांति, तीव्र विकास की दौड़ और वैश्विक बदलावों के बीच समाज में कई तरह की नई आकांक्षाएं और चुनौतियाँ एक साथ उभर रही हैं, तब हमें यह गहराई से समझने की आवश्यकता है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक महानता उसकी भव्य इमारतों, विशाल भौतिक संसाधनों या आर्थिक आँकड़ों से नहीं आंकी जाती। बल्कि, यह इस बात से तय होती है कि उसके नागरिकों का चरित्र कैसा है, उनके भीतर न्याय के प्रति कितनी गहरी निष्ठा है और समाज में समानता का भाव किस हद तक व्याप्त है। हमारा गतिशील लोकतंत्र इसी परिवर्तन में अटूट विश्वास और जन-भागीदारी का एक जीवंत प्रतीक है, जो यह सिखाता है कि देश की नींव केवल ईंट और पत्थरों से नहीं, बल्कि इंसानी मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों पर टिकी होती है।

राष्ट्र का यह पूरा सफ़र किसी एक व्यक्ति, विशेष वर्ग या अकेली सरकार का दायित्व या ठेका नहीं है, बल्कि यह हम सबकी एक साझा और सामूहिक यात्रा है, जिसमें समाज के हर एक कोने से आने वाले नागरिक का योगदान देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में विकास, अधिकारों और बदलाव को लेकर जो बौद्धिक और सामाजिक हलचल दिखाई देती है, वह इस बात का प्रमाण है कि हमारे लोग अपने भविष्य को लेकर जागरूक हैं। जब हम ऐसे दौर में अपने संविधान द्वारा प्रदत्त मूल्यों की पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ रक्षा करते हैं, तो हमारे देश की सबसे बड़ी ताक़त,यानी हमारी विविधता में एकता का खूबसूरत ताना-बाना,और अधिक मज़बूत होता है, जिससे भारत एक आत्मनिर्भर, न्यायप्रिय तथा प्रबुद्ध राष्ट्र के रूप में वैश्विक पटल पर उभरता है।

लोकतंत्र केवल पाँच साल में एक बार होने वाले चुनावों या शासन चलाने की औपचारिक प्रणाली का नाम नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की निरंतर सजगता, ज़िम्मेदारी के अहसास और अपने कर्तव्यों के प्रति अटूट निष्ठा का एक जीवंत उत्सव है। आज के समय में जब देश और समाज के भीतर अनेक ज्वलंत मुद्दों पर बहस और संवाद चल रहे हैं, तब यह और भी आवश्यक हो जाता है कि हम वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठें। यह लोकतंत्र ही है जो हमें हर तरह के भेदभाव, ऊँच-नीच और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर एक समता मूलक और समावेशी समाज की स्थापना करने की प्रेरणा देता है।

आज के इस दौर में, जब पूरी दुनिया और हमारा देश तमाम तरह की वैचारिक, तकनीकी और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहा है और एक नए भारत के निर्माण की आकांक्षा के साथ चारों तरफ़ हलचल मची हुई है, तब यही बुनियादी लोकतांत्रिक मूल्य हमें हमारी मूल संवैधानिक जड़ों से जोड़े रखते हैं। इससे हम व्यक्तिगत स्वार्थों को छोड़कर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रख पाते हैं। जब देश का हर नागरिक मौजूदा बदलावों के दौर में अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी पूरी ईमानदारी से निभाता है, तभी हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं द्वारा देखे गए एक सशक्त, आत्मनिर्भर और प्रबुद्ध भारत का सपना पूरी तरह साकार होता है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़ 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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