मौन की पहली सीढ़ी
पहली सीढ़ी मौन की, बढ़े नहीं तकरार।
मौन प्रदर्शन ही भला, झुक जाती सरकार।।
पहली सीढ़ी मौन की, सब के सुनो विचार।
निर्णय उत्तम मानिए, हो इस से उद्धार।।
पहली सीढ़ी मौन की, जाना तह के बीच।
शांत विद्रोह को करें, प्रेम भाव को सींच।।
पहली सीढ़ी मौन की, कर देती मजबूर।
असर सदा इस का बड़ा, करें सभी मंजूर।।
पहली सीढ़ी मौन की, रुक जाते संवाद।
बात मिटे तब प्रेम से, बढ़ता नहीं विवाद।।
मैं मैं तू तू छोड़िये, कलह तंज का शूल।
मौन सदा ही धारिये, खिलते स्वर के फूल।।
नफरत के बाजार में, मौन बड़ा हथियार।
थोड़ा बोलो प्रेम से, उपजे मन में प्यार।।
पहली सीढ़ी मौन की, सुन लो धर कर कान।
काम सदा शिव ही बनें, पड़े नहीं व्यवधान।।
— शिव सन्याल
