कविता
अगर मैं एक
बादल बनकर तैर जाऊँ,
क्या मुझे पूरी
दुनिया की इजाज़त मिलेगी?
अगर मैं बारिश की एक
बूंद बनकर बरसूँ,
क्या मुझे पूरी
दुनिया की इजाज़त मिलेगी?
अगर मैं ठंडक बाँटनेवाली
हवा बन जाऊँ,
क्या मुझे पूरी
दुनिया की इजाज़त मिलेगी?
और अगर नहीं,
तो मैं एक
प्यारा सा दृश्य बन जाऊँ,
जो सबकी आँखों को सुकून दे,
और सबका दुख दूर कर दे।
— अमन्दा
