राजनीति

ईरान-इज़राइल-अमेरिका महायुद्ध : मध्य-पूर्व में आग, विश्व शांति संकट में

2 मार्च 2026 को जब हम इस लेख को लिख रहे हैं, दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ से वापसी बेहद कठिन लग रही है। 28 फरवरी 2026 की रात 1 बजकर 15 मिनट पर अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमला शुरू किया। इज़राइल ने इसे ‘Operation Roaring Lion’ और अमेरिकी रक्षा विभाग ने इसे ‘Operation Epic Fury’ का नाम दिया। CENTCOM (यूएस सेंट्रल कमांड) के अनुसार, पहले 24 घंटों में 1,000 से अधिक ईरानी ठिकानों पर हमले किए गए। अमेरिकी B-2 स्टेल्थ बमवर्षकों ने 2,000 पाउंड के बमों से ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं को तबाह किया। इस हमले का सबसे बड़ा और सबसे चौंकाने वाला परिणाम था — ईरान के सर्वोच्च नेता 86 वर्षीय अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई की मृत्यु। ईरानी राजकीय प्रसारणकर्ता ने आँसुओं में यह खबर दी। इज़राइली सेना ने कहा कि यह हमला तेहरान के केंद्र में एक ‘केंद्रीय नेतृत्व परिसर’ पर किया गया था। CIA ने महीनों पहले से ख़ामेनेई की गतिविधियों पर नज़र रखी थी और यह जानकारी इज़राइली अधिकारियों को भी दी गई थी। ख़ामेनेई ने 1989 से — यानी 37 वर्षों से — ईरान की सत्ता संभाल रखी थी। उनकी मौत ने ईरान में नेतृत्व का एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर रात 2 बजे एक वीडियो जारी करके इन हमलों की घोषणा की थी। आठ मिनट के इस वीडियो में उन्होंने ईरानियों से कहा, ‘आपकी आज़ादी का समय आ गया है।’ उन्होंने न कांग्रेस को संबोधित किया, न जनता को प्रेस ब्रीफिंग दी — केवल सोशल मीडिया पर ‘Gang of Eight’ को थोड़ा पहले सूचित किया। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के अपने नामांकित सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश — एमी कोनी बैरेट और नील गोर्सच — ने 6-3 के फैसले में ट्रंप के टैरिफ के विरुद्ध फैसला दिया था, लेकिन इस युद्ध पर संसदीय जाँच को वीटो करने की पूरी संभावना बनी हुई है। सीनेटर टिम केन ने इसे ‘अवैध युद्ध’ करार दिया। NPR की रिपोर्ट के अनुसार, हमलों के दूसरे दिन — 1 मार्च को — CENTCOM ने पुष्टि की कि कुवैत में तैनात तीन अमेरिकी सैनिक — जो आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स इकाई के आर्मी सैनिक थे — मारे गए और कम से कम पाँच गंभीर रूप से घायल हुए। ट्रंप ने कहा कि ‘और अमेरिकी मरेंगे’ और उन्होंने मृतकों का ‘बदला लेने’ का वादा किया। CENTCOM ने यह भी बताया कि ईरानी नौसेना के एक जमारन श्रेणी के युद्धपोत को चाबहार बंदरगाह में डुबा दिया गया और 9 ईरानी जहाजों को नष्ट किया गया। USNI News के अनुसार, हमले की पहली 24 घंटों में कम से कम 282 ईरानी मिसाइलें और 833 ड्रोन अरब देशों की वायु रक्षा प्रणालियों ने रोके।

ईरान का जवाबी हमला और क्षेत्रीय विस्तार : ईरान ने ‘Operation True Promise 4’ के नाम से जवाबी हमला किया। CSIS (सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़) के अनुसार, ईरानी हमलों से UAE, बहरीन, क़तर, दुबई और सऊदी अरब में विस्फोट की ख़बरें आईं। दुबई के बुर्ज अल अरब की बाहरी दीवार पर एक इंटरसेप्ट किए गए ईरानी ड्रोन से आग लग गई। दुनिया का सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा — दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट — बंद कर दिया गया। USNI News के अनुसार, ईरान ने बहरीन में अमेरिकी पाँचवें बेड़े के मुख्यालय और क़तर में Al Udeid एयरबेस को भी निशाना बनाया। इज़राइल ने भी जवाबी हमला झेला। CBS News के अनुसार, ईरानी मिसाइलों ने Beit Shemesh — जो यरुशलम से 19 मील दूर है — के आवासीय इलाके में कम से कम 6 लोगों की जान ली। अमेरिकी दूतावास ने इज़राइल में अमेरिकी नागरिकों को ‘shelter in place’ यानी जहाँ हैं वहाँ रहने की सलाह दी। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ़ सलाम ने संयम का आह्वान किया। ओमान — जो वार्ता का मध्यस्थ था — ने अमेरिका से ‘इस युद्ध में और न उतरने’ की अपील की। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने 27 फरवरी को ही कहा था कि बातचीत में ‘सफलता’ मिली थी, लेकिन हमले फिर भी हुए। Wikipedia के अनुसार, 2 मार्च की शुरुआत में साइप्रस में ब्रिटिश RAF Akrotiri बेस पर ड्रोन हमले की खबरें आईं, जिससे मामूली नुकसान हुआ। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि UK अमेरिका को ‘रक्षात्मक’ हमलों के लिए ब्रिटिश ठिकानों का इस्तेमाल करने दे सकता है। UK ने उत्तरी सीरिया और जॉर्डन के ऊपर से उड़ रहे ईरानी ड्रोनों को मार गिराया। EU तीन — UK, फ्रांस और जर्मनी — ने ‘आनुपातिक रक्षात्मक सैन्य उपाय’ का समर्थन करने की बात कही।

भारत पर सीधा असर: उड़ानें बंद, नागरिक फँसे : News9Live की रिपोर्ट के अनुसार, Air India ने UAE, सऊदी अरब, इज़राइल और क़तर की उड़ानें 2 मार्च 2026 की रात 11:59 बजे तक स्थगित कर दी हैं। IndiGo ने भी मुंबई-लंदन, दिल्ली-इस्तांबुल-राक अल-ख़ैमा सहित दर्जनों मार्गों पर उड़ानें रद्द कर दी हैं। प्रभावित मार्गों में UAE, क़तर, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, अम्मान और यूरोप के कुछ शहर शामिल हैं। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कामगार और व्यापारी फँसे हुए हैं। News9Live की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने 2 मार्च की सुबह इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर बात की और ‘नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता’ देने पर ज़ोर दिया। PM मोदी ने कैबिनेट सुरक्षा समिति की एक आपात बैठक भी बुलाई। जम्मू-कश्मीर के सभी ज़िलों में खामेनेई की हत्या के विरोध में प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई। CSIS के विश्लेषण के अनुसार, OPEC देश रविवार को तेल उत्पादन बढ़ाने पर बैठक कर रहे थे ताकि कीमतें काबू में रहें। Fox Live updates के अनुसार, ब्रेंट क्रूड रविवार को लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर था — शुक्रवार के 72.87 डॉलर से 8 प्रतिशत अधिक। Strait of Hormuz के बारे में Maritime Expert साल मर्कोग्लियानो ने X पर बताया कि जलसंधि तकनीकी रूप से खुली है, लेकिन युद्ध बीमा की अनिश्चितता के कारण जहाज रुके हुए हैं। तीन तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं।

कूटनीति की विफलता और आगे की राह : CSIS के अनुसार, फरवरी में तीन दौर की वार्ता हुई — पहली 6 फरवरी को मस्कट, ओमान में। अमेरिका की तीन मुख्य माँगें थीं: यूरेनियम संवर्धन की स्थायी समाप्ति, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर सख्त सीमाएँ, और हमास-हिज़्बुल्लाह-हूती जैसे प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करना। Wikipedia के अनुसार, ओमान ने 27 फरवरी को कहा था कि ‘सफलता’ मिली है और ईरान ने कभी भी समृद्ध यूरेनियम का भंडार न बनाने और IAEA द्वारा पूर्ण सत्यापन पर सहमति दी थी। फिर भी हमले हुए — जो दर्शाता है कि निर्णय पहले से लिया जा चुका था। ट्रंप ने कहा है कि यह ऑपरेशन ‘चार सप्ताह या उससे कम’ चलेगा। लेकिन अनुभव बताता है कि मध्य-पूर्व में युद्ध कभी समयसीमा नहीं मानते। इराक में 2003 में ‘मिशन अकंप्लिश्ड’ कहा गया था — लेकिन युद्ध 20 साल चला। Pope Leo XIV ने ‘हिंसा के सर्पिल’ को रोकने की अपील की है। रूस ने IAEA की आपातकालीन बोर्ड बैठक बुलाने की माँग की है। वेटिकन, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ सभी संयम बरतने की बात कर रहे हैं — लेकिन बम गिरना बंद नहीं हुए हैं। भारत को इस संकट में तीन स्तरों पर काम करना होगा: पहला, अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना; दूसरा, ऊर्जा सुरक्षा के वैकल्पिक उपाय सुनिश्चित करना; और तीसरा, शांति की कूटनीतिक पहल में भागीदारी करना। ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ के रूप में भारत का दायित्व है कि वह इस विनाश को रोकने के लिए वैश्विक मंच पर अपना प्रभाव डाले। युद्ध कभी समस्या का समाधान नहीं होता — इतिहास यही सिखाता है और वर्तमान यही दोहरा रहा है।

— डॉ. शैलेश शुक्ला

डॉ. शैलेश शुक्ला

राजभाषा अधिकारी एनएमडीसी [भारत सरकार का एक उपक्रम] प्रशासनिक कार्यालय, डीआईओएम, दोणीमलै टाउनशिप जिला बेल्लारी - 583118 मो.-8759411563