कविता

खाली पन्ना

एक पुस्तक में
पन्नों के बीच छिपा हुआ
एक खाली पन्ना था।
क्यों है यह पन्ना
इतना अधिक खाली?
मैंने थोड़ी देर
और ध्यान से देखा।
क्षण भर में ही
मुझे उसके ऊपर
एक कोमल-सी
अनुभूति दिखी।
अचानक, पन्ने के किनारे से
गिर पड़ा
टुकड़ों में टूटा हुआ
एक हृदय।
शायद वही था
उस कोमलता का कारण भी।
फिर मैंने वह पुस्तक
दोबारा बंद कर दी —
उस खाली पन्ने को,
उस टूटे हुए हृदय को
दोबारा न देखने के लिए।

— अमन्दा सरत्चन्द्र

एस. अमन्दा सरत्चन्द्र

श्री लंका