दिल का रिश्ता
तेरी खामोशी में,
छिपा है मेरा सुर भी —
मन गुनगुनाता।
भोर की किरणें,
तेरे नाम से चमकें —
दिन मुस्कुराए।
साँसों की डोरी,
तेरे संग बंधी ऐसी —
टूटे ना कभी।
पलकों के साये,
तेरे सपनों से महके —
नींद फूल बनें।
बारिश की बूँदें,
तेरे स्पर्श सी लगें —
मन भीग जाए।
धूप का आँचल,
तेरे स्नेह को ओढ़े —
छाँव बन जाए।
पंछी की उड़ान,
तेरे अरमानों सी है —
आसमान बोले।
दिल का ये रिश्ता,
ना शब्दों का मोहताज —
बस आत्मा जाने।
— डॉ. अशोक, पटना
