जन्मभूमि
“कब से भूखी बैठी हूँ? कितनी देर कर दी भैया!”
“सॉरी बहना! थोड़ी देर हो गई,” राजीव ने कान पकड़ कर माफी माँगते हुये कहा।
“माफ किया,” मुस्कुराती हुई सुधा बोली,”हाथ बढ़ाओ भैया! राखी बाँध दूँ।” राजीव ने हाथ बढ़ाया। उसकी कलाई में कई राखियाँ बँधे देख सुधा बोली, “अरे! तुम्हारी कलाई पर पहले से ही इतनी सारी राखियाँ बँधी हैं। मैं कहाँ बाँधू?”
“तू दूसरे हाथ में राखी बाँध दे बहना!”
“तुम भी कमाल करते हो भैया! जानते हो? बायें हाथ में राखी नहीं बाँधी जाती।”
“अच्छा, तो यह बात है। दायें हाथ में सबसे ऊपर बाँध दे,” राजीव ने समझाया।
“एक बात समझ में नहीं आती कि जब तुम्हारी सगी बहन है तो तुम्हें मुँहबोली बहनों की क्या जरूरत है?”
“मैं कैसे मना करूँ? वे मुझे अपना भाई मानती हैं। मेरी भी जिम्मेदारी बनती है कि नहीं? तू ही बता।”
“क्यों? उनको केवल मेरा भाई ही मिला और कोई नहीं। शायद यही कारण है कि तुम्हें मेरी होने वाली भाभी नहीं मिली।”
“नहीं बहना! यह बात नहीं है। मैं किसी को दिल-ओ-जान से प्यार करता हूँ। उसकी एक पुकार पर मैं नहीं रुक सकता। वह मेरी एकमात्र प्रेमिका है।”
— डाॅ अनीता पंडा ‘अन्वी’
