कविता

थाम लेना मेरी जीवन की पतवार

कान्हा तेरे दूर जाने से हो जाती हूं उदास,
महक जाती कलियों की तरह जब आते तुम पास
रहती निर्बल असहाय जब तुम नहीं होते पास
खिल जाती हूं फूलों सी होती जब तेरे मिलन की आस
मेरे आराध्य मेरे श्याम दिल की यही अरदास
रहना सदा तुम मेरे साथ, बुझाओ मन की प्यास
तुम ही लगाओगे मेरी पार नैया मुझको यह दृढ़ विश्वास
तुम बन जाना मेरे खेवैया थाम लेना जीवन की पतवार

— रीना कुमारी

रीना कुमारी

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