कविता

मां यमुना

हम निर्मल- पावन जल की महिमा नहीं घटाएं,
पतितपावनी मां यमुना को निर्मल पुनः बनाएं ।

प्राणदायिनी मां यमुना को बचाने जन-जन आगे आएं,
पुण्यदायिनी मां यमुना को केमिकल – विष से बचाएं ।

आओ- आओ सब साथी मिलकर हाथ बंटाएं,
पतितपावनी मां यमुना को निर्मल पुनः बनाएं ।

पूजा -पाठ की सामग्री को यमुना में न बहाएं,
सड़ा-गला कचरा बहाकर जल को जहर न बनाएं ।

किसी भी तरह की मूर्ति-तस्वीर का विसर्जन न करें,
हो जायें जागरूक, धर्मवीर बनें, आडंबर न करें ।

निकट ही विसर्जन हेतु, यमुना घाट पर कुंड बनाएं,
पतितपावनी मां यमुना को निर्मल पुनः बनाएं ।

कहीं न कोई घाट- किनारा वृक्षों से खाली रहे,
मां यमुना का हर किनारा हरियाली से भरा रहे ।

बेशक कोई न हो पर्व- स्नान तिथि यमुना की नित करो सफाई,
हो जाओ तैयार धर्मप्रेमी पावन कर्म करने की बारी आई ।

प्राणदायिनी- पुण्यदायिनी अविरल मां यमुना को बचाएं,
पतितपावनी मां यमुना को निर्मल पुनः बनाएं ।

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111