बाल दिवस पर राष्ट्राभिनंदन
सवेरे की धूप
बच्चों की हँसी संग
रंग भरती है
नई उमंगें
आकाश की चौखट पर
उड़ान माँगें
नन्हा कदम
भविष्य की राहों में
चमक बिखेरे
मासूम सपने
तितली-से उड़ते हैं
नभ को छूते
खिलते चेहरे
बयां करते दुनिया को
बातें उजली
बाल मन पावन
धरती के आँगन में
कोमल स्पर्श
आशा के बीज
कलियों-से खिलते हैं
नव रस के साथ
राष्ट्र का गौरव
इन्हीं की मुस्कान में
कल का सूरज
निर्मल बचपन
नदियों का स्वच्छ जल
जीवन घोले
शांति का स्वर
नन्ही धड़कनों में
गीत जगाए
आओ मिलकर
हर छोटे हृदय को
सुख का वर दें
उजले कल की
सुबह को खिलने दें
ममता बनकर
— डॉ. अशोक
