कविता

बिहार चुनाव और दमदार जीत

होता है जब अपनापन व अडिग आत्म विश्वास प्रगट,
जागती है तब जनता होता अविस्मरणीय तख्ता पलट,
भाग जाते हैं रण क्षेत्र छोड़ दल बदलू निठल्ले सरपट,
ग़लती नहीं दाल वहॉं और मिलती नहीं फिर से चौखट ।

छला जिन्होंने बार-बार प्रजा को जंजीरों से बांधे पॉंव,
आज उसने हुंकार भरी एक और चलाया अपना दांव,
विकास मॉंगती है जनता देखती है वो मन का भाव,
है उसके हाथों में शक्ति कर सकती वो धूप को छांव ।

जनता को जिन्होंने कमजोर माना डराया धमकाया,
आज उन्हीं को जनता ने बाहर का रास्ता दिखलाया,
विपक्ष बड़बोला मिला न ठेला मुॅंह देखो है बिचकाया,
ढूंढें बहाना पुराना जमाना जनता ने उसको भगाया ।

जनता को मत समझों नादान सौदा नहीं है ये सस्ता,
ऑंखों पर पटृटी जिन्होंने थी बॉंधी चले समेट बस्ता,
चूसा था खून घावों पर छिड़का नून बदला अब रस्ता,
दिखेगा अब हर गली-मोहल्ले हर बच्चा बूढ़ा हॅंसता ।

जनता जनार्दन ने अपनी कमान फिर से हैं संभाली,
लो आई मनभावन सरकार बिहार में बजाओ ताली,
खिलेंगे फूल लहलहाएगी फसल झूमेंगी “आनंद” डाली,
जुड़ेगा स्वर्णिम अध्याय नया मिटेगीं अब स्याही काली ।

मारा चॉंटा जिन्होंने हमें बॉंटा ये एकता की ही ताकत,
लगाया चौका दिया है मौका नई सरकार का स्वागत,
महाभियान हुआ अब शुरू खत्म हुई पुरानी महाभारत,
हर एक राज्य के हिस्से में धड़कता हैं संपूर्ण भारत ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु