कविता

लोभ या रूह

कैक्टस एवं मनीप्लांट को
घर के भीतर बालकनी में
ससम्मान सुसज्जित जगह मिली
गमले इतराये
पानी के फव्वारों से
घर के सदस्यगण
अपने से पहले नहलाये।

हम कैक्टस के कांटों के प्रेमी
फूल उगने की प्रतीक्षा करते रहे
मनी प्लांट की लताओं में
मनी ढूंढ़ते रहे।

तुलसी माता का चौरा
अब घूर हो गया
अमरीका ने जब तुलसी के गुण गिनाए
हमारा आधुनिक प्रेम
लड़खड़ाकर काफूर हो गया।

हम तुलसी का एक पौधा
अमेज़न से मंगाए हैं
कैक्टस और मनी प्लांट की छाया तले
उसको लगाए हैं।

देखते हैं केर-बेर का यह संग
क्या गुल खिलाता है?
हमारा यह प्रेम
लोभ तक पहुंचता है
या
रूह तक ले जाता है।

— डॉ अवधेश कुमार अवध

*डॉ. अवधेश कुमार अवध

नाम- डॉ अवधेश कुमार ‘अवध’ पिता- स्व0 शिव कुमार सिंह जन्मतिथि- 15/01/1974 पता- ग्राम व पोस्ट : मैढ़ी जिला- चन्दौली (उ. प्र.) सम्पर्क नं. 919862744237 Awadhesh.gvil@gmail.com शिक्षा- स्नातकोत्तर: हिन्दी, अर्थशास्त्र बी. टेक. सिविल इंजीनियरिंग, बी. एड. डिप्लोमा: पत्रकारिता, इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग व्यवसाय- इंजीनियरिंग (मेघालय) प्रभारी- नारासणी साहित्य अकादमी, मेघालय सदस्य-पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी प्रकाशन विवरण- विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन नियमित काव्य स्तम्भ- मासिक पत्र ‘निष्ठा’ अभिरुचि- साहित्य पाठ व सृजन