लोभ या रूह
कैक्टस एवं मनीप्लांट को
घर के भीतर बालकनी में
ससम्मान सुसज्जित जगह मिली
गमले इतराये
पानी के फव्वारों से
घर के सदस्यगण
अपने से पहले नहलाये।
हम कैक्टस के कांटों के प्रेमी
फूल उगने की प्रतीक्षा करते रहे
मनी प्लांट की लताओं में
मनी ढूंढ़ते रहे।
तुलसी माता का चौरा
अब घूर हो गया
अमरीका ने जब तुलसी के गुण गिनाए
हमारा आधुनिक प्रेम
लड़खड़ाकर काफूर हो गया।
हम तुलसी का एक पौधा
अमेज़न से मंगाए हैं
कैक्टस और मनी प्लांट की छाया तले
उसको लगाए हैं।
देखते हैं केर-बेर का यह संग
क्या गुल खिलाता है?
हमारा यह प्रेम
लोभ तक पहुंचता है
या
रूह तक ले जाता है।
— डॉ अवधेश कुमार अवध
