सामाजिक

सोशल मीडिया की रीलों ने फिल्मों को पीछे छोड़ दिया

युवा पीढ़ी का झुकाव ज्यादातर ऐसा हो गया कि वे नाचने, रील बनाने और लाइक्स के पीछे भागने में ही भविष्य देख रहे हैं।सच तो यह है कि हमसे सोचने की क्षमता छीन ली गई, और मनोरंजन को ही उद्देश्य बना दिया गया।और इसे “जागरूकता” समझने की गलती की जा रही है।सोशल मीडिया पर रील का जो फंडा चल रहा है।उसमें अश्लील शब्दों का अभिनय के साथ ऐसा माहौल पैदा हुआ कि आप मोबाइल में रील देखते -देखते कब अभिनय करने वाले नंगी गालियां बकने लग जाये।इसका देखने वालों को भान नहीं रहता।मोबाइल की आवाज परिवार में सुनाई देती है। फेसबुक का कोई माय बाप है कि नही वार त्यौहारों पर नानवेज बनाए जाने के वीडियो  डाले जा रहे इसके अलावा स्त्रियों,आदमियों  की बेरहम पिटाई के वीडियो डाले जाते है जो वीभत्स की श्रेणी में आते है।इन वीडियो डालने वालों का कोई अता पता नही।उनके खिलाफ कोई एक्सन।फेसबुक का सेंसर बोर्ड या एडमिन तो होगा ही।कैसे परमिशन देता है फेसबुक पर वीडियो डालने की। वहाँ के प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई क्यों नही की जाती ।हम फेसबुक देखने वाले स्वच्छ मानसिकता चाहते है।ऐसे दृश्यों से विकृत मानसिकता का जन्म होता है।क्या आप लोग स्वच्छ मानसिकता चाहते है।विरोध दर्ज करें।  विकृति फैलाता ये रील के धंधे पर अंकुश की आवश्यकता है।पहले से ही युवा पीढ़ी ऑन लाइन गेम में बर्बाद हो चुकी और ऊपर से विकृत मानसिकता को बढाने वाले वीडियो।अब तो गांव -गांव में वीडियो रील बनाने का चलन जोरो पर है।

— संजय वर्मा “दृष्टि”

*संजय वर्मा 'दृष्टि'

पूरा नाम:- संजय वर्मा "दॄष्टि " 2-पिता का नाम:- श्री शांतीलालजी वर्मा 3-वर्तमान/स्थायी पता "-125 शहीद भगत सिंग मार्ग मनावर जिला -धार ( म प्र ) 454446 4-फोन नं/वाटस एप नं/ई मेल:- 07294 233656 /9893070756 /antriksh.sanjay@gmail.com 5-शिक्षा/जन्म तिथि- आय टी आय / 2-5-1962 (उज्जैन ) 6-व्यवसाय:- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग ) 7-प्रकाशन विवरण .प्रकाशन - देश -विदेश की विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में रचनाएँ व् समाचार पत्रों में निरंतर रचनाओं और पत्र का प्रकाशन ,प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक " खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा -अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के 65 रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता भारत की और से सम्मान-2015 /अनेक साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित -संस्थाओं से सम्बद्धता ):-शब्दप्रवाह उज्जैन ,यशधारा - धार, लघूकथा संस्था जबलपुर में उप संपादक -काव्य मंच/आकाशवाणी/ पर काव्य पाठ :-शगुन काव्य मंच