मेरा क्या हुकुम आका
मुझे बहुत खुशी हो रही है जब किसी ने मुझे
बड़े ही आदर के साथ कहा
कुकुर वाले साहब आप तो
देश के बहुत बड़े जिम्मेदार हैं,
आप संविधान के फरमानदार हैं,
संविधान के कर्ताओं ने कुकुर
ढूंढने और पहचान करने की जिम्मेवारी दी है
तो क्यों नहीं करते,
जनता का दुख दर्द क्यों नहीं हरते,
गुरूजी आज लापरवाह है,
शासन की इच्छाओं से बेपरवाह है,
तो थोड़ा संभालो,
मैं संभल कर बोला कि साहब
हमारी समस्या कुत्ते नहीं जिम्मेदार लोग हैं,
इनका चारा है हर स्तर पर तय,
इन्हें और साथ वालों को भी थोड़ा खिलाइए,
अंधभक्तों की तरह जिम्मेदार बनाइए,
अंधभक्ति हर समस्या का निदान नहीं है,
संपूर्णता वाला ज्ञान नहीं है,
अरे भई सरकार को सिखाओ,
सही रास्ते पर थोड़ा तो चलाओ,
बताओ यार कि
सिर्फ गुरूजी ही लगता कामचोर है,
कि बदल गया ये दौर है,
अब तो लगता है कि आदरणीय
फालतू गुरूजी को लात मार हटाओ,
और संस्था में किसी चमचे को बिठाओ।
— राजेन्द्र लाहिरी
