गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

एक लड़की अब किसी से प्यार जो करने लगी,
रात दिन अब आईने के सामने मिलने लगी।

पहले वो इसकूल का ही काम करती थी मगर,
अब वो अपनी कापियों में शाइरी लिखने लगी।

एक लड़की ने जो उस लड़के से थोड़ी बात की,
इस ज़रा सी बात पर ही उससे वो लड़ने लगी।

पहले जिन पैसों से वो लाती थी खट्टी इमलियां,
अब वो इन पैसों से अपनी चूड़ियां लेने लगी।

जब उसे तड़पाया बेहद हिज़्र ने महबूब के,
वो सहेली से गले मिलकर कहीं रोने लगी।

इसपे हल्का सा भी धब्बा उसको अब खलने लगा,
अब तो वो अपना दुपट्टा रोज़ ही धोने लगी।

— अरुण शर्मा साहिबाबादी

अरुण शर्मा साहिबाबादी

नाम-अरुण कुमार शर्मा क़लमी नाम-अरुण शर्मा साहिबाबादी पिता -जगदीश दत्त शर्मा शिक्षा-एम ए उर्दू ,मुअल्लिम उर्दू ,बीटीसी उर्दू। जीविका उपार्जन- सरकारी शिक्षक पता-एफ़ 73, पहली मंज़िल,पटेल नगर-3, ग़ाज़ियाबाद। मोबाइल-9311281968 पुस्तकें-खोली, झुग्गी,पुल के नीचे एक पत्ती अभी हरी सी है, मुनफ़रिद,इजतिहाद.मुफ़ीक़ ( सभी कविता संग्रह) पुरुस्कार-उर्दूकी कई संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत। कई सम्मान समारोह आयोजित हुए हैं।

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