ग़ज़ल
एक लड़की अब किसी से प्यार जो करने लगी,
रात दिन अब आईने के सामने मिलने लगी।
पहले वो इसकूल का ही काम करती थी मगर,
अब वो अपनी कापियों में शाइरी लिखने लगी।
एक लड़की ने जो उस लड़के से थोड़ी बात की,
इस ज़रा सी बात पर ही उससे वो लड़ने लगी।
पहले जिन पैसों से वो लाती थी खट्टी इमलियां,
अब वो इन पैसों से अपनी चूड़ियां लेने लगी।
जब उसे तड़पाया बेहद हिज़्र ने महबूब के,
वो सहेली से गले मिलकर कहीं रोने लगी।
इसपे हल्का सा भी धब्बा उसको अब खलने लगा,
अब तो वो अपना दुपट्टा रोज़ ही धोने लगी।
— अरुण शर्मा साहिबाबादी
