गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/09/202620/08/2026 0 Comments ग़ज़ल मकीनों को लगते हैं ये ही सुहाने,कई घर नगर में हैं अब भी पुराने। जिसे गुम किये भी हुए हैं Read More
कविता अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/09/202620/08/2026 0 Comments कविता रिश्ते दारों के आपस में,इस दरजा पुख़्ता नाते थे,इक मेहमां जाने से पहले,दो मेहमां घर में आते थे,तब घर में Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 20/08/202620/08/2026 ग़ज़ल दोनों दरयाओं ने जोड़े जब से रिश्ते प्यार के,तब से बेहतर हो गये हैं ज़ोर इनकी धार के। ईद और Read More
मुक्तक/दोहा अरुण शर्मा साहिबाबादी 20/08/202620/08/2026 मुक्तक जैसे तस्वीर कोई सजाती रही,वो मुझे देखकर मुस्कुराती रही,मैं अभी सिर्फ़ बच्चा था पर मेरी मां,मुझको ख़्वाबों में दूल्हा बनाती Read More
कविता अरुण शर्मा साहिबाबादी 20/08/202630/08/2026 कविता ना उसका चेहरा तकते थे,ना उससे कुछ बतियाते थे,मां ने जिस पर उंगली रख दी,वो लड़की घर ले आते थे,तब Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/06/202627/06/2026 ग़ज़ल कितने हसीन हैं ये संवारे बग़ैर भी,कुछ लोग आ गऐ हैं पुकारे बग़ैर भी। इक दूसरे भी रंग को उसने Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/05/202602/01/2026 ग़ज़ल ये बच्चे शाम को भी सताते ज़रूर हैं,जलते हुए चराग़ बुझाते ज़रूर हैं। होली गुज़रने पर भी इन्हें चैन नहीं Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/04/202602/01/2026 ग़ज़ल कई बार छत पर भी जाना पड़ा है,कि इक भारी कपड़ा सुखाना पड़ा है। मैं जब तेरी मूरत बनाने चला Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/03/202602/01/2026 ग़ज़ल अपनी कुर्बानियां जब मैं गिनने लगी,बेवफाई तेरी और खलने लगी। तू मेरा अब नहीं भूल बैठी हूं और,तुझसे मिलने को Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/02/202602/01/2026 ग़ज़ल जगह जगह पे मुझे बेहिजाब होना था,इसी तरह से मेरा इंतिख़ाब होना था। क़दम क़दम पे जहां इक गुलाब होना Read More