गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/04/202602/01/2026 ग़ज़ल कई बार छत पर भी जाना पड़ा है,कि इक भारी कपड़ा सुखाना पड़ा है। मैं जब तेरी मूरत बनाने चला Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/03/202602/01/2026 ग़ज़ल अपनी कुर्बानियां जब मैं गिनने लगी,बेवफाई तेरी और खलने लगी। तू मेरा अब नहीं भूल बैठी हूं और,तुझसे मिलने को Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/02/202602/01/2026 ग़ज़ल जगह जगह पे मुझे बेहिजाब होना था,इसी तरह से मेरा इंतिख़ाब होना था। क़दम क़दम पे जहां इक गुलाब होना Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/01/202601/09/2025 ग़ज़ल तुम से दूर जाते ही अश्कबार हो जाना,ये है मेरी आंखों का इश्तिहार हो जाना। इसमें ख़तरा है बेशक फिर Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/12/202501/09/2025 ग़ज़ल एक लड़की अब किसी से प्यार जो करने लगी,रात दिन अब आईने के सामने मिलने लगी। पहले वो इसकूल का Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/11/202501/09/2025 ग़ज़ल काग़ज़ है इतना हल्का बचाया न जायेगा,ये गहरा रंग इससे छुड़ाया न जाऐगा। टूटा है एक ताजमहल इस ज़मीन पर,अब Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/10/202501/10/2025 ग़ज़ल निकल आऐ कोई रिश्ता वहीं से,किसी को देखिए छूकर कहीं से। ये लम्बा फ़ासिला कम कीजिए कुछ,नज़र आते नहीं हैं Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/09/202501/09/2025 ग़ज़ल शराबी से ख़फ़ा होकर ये बेचारी नहीं जाती,यहां बीवी की शौहर से वफ़ादारी नहीं जाती। बहुत ननुक़सान करती हैं हमारी Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/08/202528/04/2025 ग़ज़ल किसी के ग़म मिटा पाता,कि तब तू और मुस्काता। तू चाहे खाता ना खाता,मगर बूढ़ी से फल लाता। नहीं है Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/07/202528/04/2025 ग़ज़ल जब हम इनको सुलझाते हैं,कुछ धागे कट भी जाते हैं। वो ख़ंजर से भी घातक हैं,जो ज़ख़्मों पर मंडलाते हैं। Read More