गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/08/202528/04/2025 ग़ज़ल किसी के ग़म मिटा पाता,कि तब तू और मुस्काता। तू चाहे खाता ना खाता,मगर बूढ़ी से फल लाता। नहीं है Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/07/202528/04/2025 ग़ज़ल जब हम इनको सुलझाते हैं,कुछ धागे कट भी जाते हैं। वो ख़ंजर से भी घातक हैं,जो ज़ख़्मों पर मंडलाते हैं। Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/06/202502/06/2025 ग़ज़ल अब अमीरों के भी घर में खुदकुशी होने लगी,इस मौहब्बत की कमी से हर कमी होने लगी। फूल नक़ली भी Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 01/05/202502/05/2025 ग़ज़ल जनम दिन पे मां आई मुझको बुलाने,मुझे मेरे बचपन के सामां दिखाने। मुझे मां चली फिर नज़र से बचाने,मुझे काला Read More
गीतिका/ग़ज़ल अरुण शर्मा साहिबाबादी 20/04/202528/04/2025 ग़ज़ल कि जब मेरी बेटी लगेगी कमाने,मैं उस रोज़ जाऊंगा गंगा नहाने। नहीं रोक पायेंगे ज़ख़्मी भी शाने,मैं निकला है बेटी Read More