2025 को अलविदा
अंग्रेजी साल का आखिरी महीना दिसंबर है सबसे जुदा,
कुछ दिनों में बस अब करेंगे हम यूॅं 2025 को अलविदा,
जीवन के इस मोड़ पर यह साल कितने रंग संग लाया,
समय की दौड़ में कुछ ने बहुत खोया तो कुछ ने पाया ।
इस साल ने दहशत से ऑंखों में दिए ऑंसू हुए तन्हा,
संजोए कुछ नयनों में खुशी के ऑंसू बना ख़ास लम्हा,
बड़ी-बड़ी चुनौतियों और मुश्किलों से भरा हुआ ये वर्ष,
बेहद कठिन वक्त और भारतवर्ष के लिए भीषण संघर्ष ।
सुखों-दुखों की यादों से लबरेज़ खट्टा-मीठा रहा साल ये,
कहीं उजडी़ बस्तियॉं और कई सितारों को ग्रसा काल ने,
कहीं बाढ़ कहीं सूखा तो कहीं बिजली ने बरसाया कहर,
कहीं हवा हो गई जहरीली और धूॅं-धूॅं करते जले शहर ।
देश की जल थल नभ सैन्य शक्तियों ने आत्मबल दिया,
भारतवासियों को नई ऊर्जा शक्ति साहस से भर दिया,
2026 की महत्वपूर्ण योजनाओं का आगाज़ अब होगा,
“आनंद” हौसलों से ख्वाबों का फिर से आमना-सामना होगा ।
विविधता में एकता के साथ हम चलेंगे एक दूजे के संग,
देंगे भारत को विकास और प्रगति के नए ख़ूबसूरत रंग,
बीते साल की गलतियों से लेकर सबक बढ़ेंगे आगे हम,
प्यारा भारत व हर भारतवासी रहे ख़ुशहाल हममें हैं दम ।
— मोनिका डागा “आनंद”
