जादुई अहसास
शांत झरना गाए
पगडंडी पर चाँद उतरे
मन में कंपन हो
दूर कहीं से
हवा फूलों को छू आए
भीतर रौशनी हो
कोमल स्पर्श सा
सपनों की पलकों पर
अद्भुत सी धुन हो
नदी की लहरें
अधखुले शब्दों जैसी
मन को पढ़ती हों
पहली बारिश
बिखरी मिट्टी की ख़ुशबू
यादें जगाती हो
सुनहरी सुबह
पत्तों पर ठहरी धूप
सीख दे जाए
शाम की खामोशी
अपने भीतर की आवाज़
साफ़ कर जाए
निशब्द रातें
आसमान की गहराई
हृदय को खोलें
— डॉ. अशोक
