कविता

चेन्नई में दितवाह तूफ़ान

चेन्नई में दितवाह तूफ़ान ने बहुत हड़कंप मचाया,
ये दितवाह तूफ़ान आफ़त और सिरदर्द संग लाया,
जगह-जगह शहर में भरा है कितना सारा पानी,
याद आने लगी पुराने साइक्लोन की कहानी ।

नई-पुरानी सड़के टूटी और गड्ढों की हुई भरमार,
पुनः मरम्मत कराएं या सिर पीटे अपना सरकार,
मेट्रो के काम में भी बाधक बन खड़ा है तूफ़ान,
हवाओं ने किया नाक में दम सभी हुए परेशान ।

कीचड़ गंदगी मक्खी मच्छर फैले हैं चारों ओर,
मलेरिया डायरिया डेंगू के खतरे का है अब जोर,
जनजीवन अस्त-व्यस्त प्रकृति ने दंडित किया,
सूरज ने भी खुद को काले बादलों में छुपा लिया ।

गरीब आदमी करें क्या घर में घुस गया है पानी,
कंगाली में गिला आटा मुश्किल हुई जिंदगानी,
दिन-रात लगातार बारिश हाय रूकेगी ये कब,
प्रभु रहम करो करें “आनंद” प्रार्थना जीव सब ।

दिसंबर की ठिठुरन और संग मूसलाधार बरसात,
सांय-सांय करें हवा कड़के बिजली सर्द दिन-रात,
पेड़-पौधे टूटे पशु-पक्षियों को भी हुआ नुकसान,
प्रकृति ने रोष प्रकट किया कितनों की गई जान ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु