गीतिका/ग़ज़ल

नफरत नहीं प्रेम करो

नफरत नहीं प्रेम करो, समझ जीवन का सार।
संसार मुट्ठी में बाॅंध ले, यह जीवन दिन चार।
कहाॅं से आए कहाॅं है जाना हैं मुसाफिर आज।
सुबह किसने है देखी यहाॅं जब भी पड़ती रात।
भेदभाव पाखंड में मत उलझो , सुन यह बात।
अमन चैन के दौर में , मत करना असुरी घात।
मानव जाति एक है, ईश्वर ने रचा यह संसार।
नफरत नहीं प्रेम करो, समझ जीवन का सार।
मेरा मेरी छोड़ दे, वृथा ईर्ष्या द्वेष अरु अहंकार।
मिलकर रहना प्यार बांटना, सत्य इसे स्वीकार।
ईश्वर ने खुशियां दी इतनी, उसका कर आभार।
उसकी नजर में एक सभी है, क्यों करें तकरार।
दीन दुखी की सेवा करना तब होगा बंदे उद्धार।
नफरत नहीं प्रेम करो, समझ जीवन का सार।
जीव जन्तु मालिक के जाए, करें बसेरा साथ।
करें संरक्षण उनका मन से, दे कर अपना हाथ।
तेरे किये कर्म का लेखा, नित लिखते हैं नाथ।
कर्म करिये सुथरा मन से, चलिए सत्य के पाथ।
झंझावात कितने भी आएं, मानो नहीं तुम हार।
नफरत नहीं प्रेम करो, समझ जीवन का सार।

— शिव सन्याल

*शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995