कविता

मनायेँ नव वर्ष

सब कोई सुखी व स्वस्थ रहे
पाए जीवन में रोज नया उत्कर्ष ,
गीत खुशी के गा-गाकर
मनायेँ अब के नव वर्ष ।

देश में न हो कहीं भूखमरी,
कहीं कोई ना लुटे अ्वला नारी ।
अब ना रहे कोई अत्याचारी ,
दूर हो जाएँ सबकी लाचारी ।
दूर हटे जीवन से बेरोजगारी,
अब तो मिट जाएँ क्लेश सारी ।
माँ-बाप ना पड़े किसी को भारी ,
बनें चारों ओर फूलों की क्यारी ।
सब कोई तरोताजा रहे
करता रहे नित जीवन-संघर्ष ,
नृत्य के ताल-ताल पर मनायेँ नव वर्ष ।

— सुव्रत दे

सुव्रत दे

संपादक--हिन्दी-ज्योति, सेवा नर्सिंग होम के निकट , साखीपाड़ा, सम्बलपुर--768001 उडीसा। मो. 8457032905