दो कविताएँ
- लोग
मैंने प्यार बाटां लोगों ने मुझसे नफरतें बाटीं
मैंने सम्मान बाटां लोगों ने मुझे अपमानित किया
मैंने खुशियां दी लोगों ने मुझे दुःख दिया
मैंने अपना अमूल्य समय दिया लोगों ने मुझे फालतू समझा
मैंने सबको अपना समझा लोगों ने मुझे पराया बना दिया
मैंने हमेशा मदद की और लोगों ने मुझे हमेशा नकारा।
मैंने कभी किसी का बुरा करने का सोचा भी नहीं
और लोगों ने हमेशा मेरे साथ बुरा किया!
2. यादों का शहर ग्वालियर
हर एक सोच खुद में ही अलग ,
मासूमियत ,प्यार का वास ,
स्नेह से स्वागत , लगाव
शहर के चपे- चपे में अपनेपन का एक एहसास ।
हर दिल में हर किसी के लिए हमदर्दी,
चाहत के फसाने, हर एक सोच अलग ,
शहर की हवा में ही अनूठा सा प्रेम वसा,
प्रकृति भी स्वागत करती अपने मेहमानों का,
जो भी यहां आए बस यहीं का हो जाए ,
और जो यहां से जाए ढेर सारी यादें ले जाए
यादों का शहर ग्वालियर
— गंगा माँझी
