गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दिये कितने आघात पूछकर।
मार दिया था जात पूछकर।।

हाल पूछना रह जाता है।
करते हैं क्या घात पूछकर।।

बरसी क्या खेतों में बारिश।
बादल से ही बात पूछकर।।

मन में कुछ होता देखो।
देते हैं क्या मात पूछकर।।

ख़्वाबों में आये थे क्या।
हमसे कल रात पूछकर।।

बढ़ा कदम हटाया पीछे।
( मार दिया औक़ात पूछकर।। )

कुछ देने को देते तुम क्या।
बातों में सौगात पूछकर।।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’