कविता

हरे सांप का सर्वे

पता नहीं मुझे क्या सूझा कि मैंने सोचा
चलो आज हरे सांप का सर्वे किया जाये,
कितने हैं सबको सूचित किया जाये,
हरा सांप अपने रंग के कारण
जल्दी से दिखाई नहीं देता है,
जिससे अपने शिकार को पकड़ने का
वो हर बार फायदा लेता है,
हरा सांप हर जगह खड़ा है,
बस शक्ल सूरत दूसरा ले पड़ा है,
किसी भी दफ्तर में चले जाइए
आपको देखकर वो जरूर लपलपायेगा,
आपने समझने में देर की तो फ़ाइल आगे नहीं जाएगा,
सबसे ज्यादा ये सर्प समाज के बीच रहता है,
जो संघर्षों के समय सुस्त पड़ता है,
लेकिन दुश्मन को देख लालची जमीर जागता है,
समाज को हर संभव नुकसान पहुंचाने की राहों में
बड़ी मुस्तैदी से सरपट भागता है,
परिवर्तन लाने का दंभ भरना और बात है,
अहसान फरामोश में नहीं मिलता सामाजिक जज्बात है,
अतिशीघ्र उन्हें ताज और सफलता चाहिए,
जरूरी लगा तो सामाजिक विफलता भी चाहिए,
राजनीतिक दलों में,समाज में और हरे पेड़ में ये मिलेंगे,
दुश्मनों की सफलता पर ही इनके चेहरे खिलेंगे,
तो अपने आजू बाजू इधर उधर खोजो आसपास,
न जाने कब किधर से निकल जाये हरा सांप।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554