कविता

कल्पवासी चले प्रयाग

पावन माघ मास का हुआ है शुभारंभ और घाटों पर रौनक छाई,
एक माह के इस उत्सव ने भक्तों में अनोखी संकल्प शक्ति जगाई,
कल्पवासी चले प्रयाग प्रण लेकर कठिन व्रत का बहुत ही खास,
12 वर्षों की यह अद्भुत तपस्या माघ मास गंगा स्नान व उपवास ।

कल्पवासी करेगें धरती पर शयन सत्य भाषण वाणी पर संयम,
एक महीने गृहस्थ आश्रम से हो दूर करेंगे हरि की सेवा प्रथम,
सुंदरतम माघ महात्म तीनो काल सुबह दोपहर संध्या बांचेंगे,
तुलसी जी और जौ को प्रतिदिन सींच संकीर्तन सत्संग करेंगे ।

गंगा की रेती और संगम स्थल पर संतों संग “आनंद” होगा भरपूर,
समर्पित कर तन मन धन सब ईश्वर को मायावी जग से वे रहेंगे दूर,
दुखियों की करेंगे स्वैच्छिक सेवा स्वयं भोजन बना कर ग्रहण करेंगे,
आए चाहे कोई बाधा एक माह कल्पवास के स्थान को नहीं छोड़ेंगे ।

माघ मास की महिमा विशाल देती जीवन संजीवनी शक्ति अनंत,
इन्द्रियों पर साधकर संयम अनूठा मोक्ष गमन भीतर होता जीवंत,
जहॉं अनूठा अमृत झरता अम्बर से जो व्याधि मुक्त बनाता जीवन,
बड़ा ही पवित्रतम होता भक्त-भगवान व पूजनीय संतों का मिलन ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु