कविता

जीत होगी तेरी दमदार

सत्य के पथ पर हो अग्रसर,
बढ़े जा तू कर्मों के रथ पर,
अपने सपनों को दे विस्तार,
हौसलों की बुलंद उड़ान भर ।

निराशा को पूर्णतः नकार कर,
आत्मविश्वास का कर संचार,
परिश्रम की तीव्र हुंकार भर,
लक्ष्य विजय श्री साकार कर ।

ईश्वर को कर प्रतिदिन नमस्कार,
रोम-रोम में “आनंद” प्रवाह कर,
साथ लेकर चल अपना परिवार,
खुद में खुशियों का उत्साह भर ।

अपनी प्रतिभा पर कर विचार,
तुझमें बसा अनुपम कलाकार,
कदमों को दे दिशा संग रफ्तार,
तू है सक्षम सुंदर सृजनकार ।

मीठी वाणी प्रेम की रसधार,
गुणवान को पूजता है संसार,
ज्ञान कौशल को बना आधार,
फिर जीत होगी तेरी दमदार ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु